- Pan-India Superstar Shivarajkumar Unleashes His Fiercest Avatar Yet as the ‘Original Monster’; First Poster and Motion Poster Out Now
- पैन इंडिया सुपरस्टार शिवराजकुमार का अब तक का सबसे खूंखार अवतार ‘ओरिजिनल मॉन्स्टर’; पोस्टर और मोशन पोस्टर हुआ रिलीज
- Akshay Kumar-Vipul Amrutlal Shah reunite for alien thriller Samuk after 12 years
- Five Bollywood actor-filmmaker partnerships that became a genre of their own
- Mismatched S4 to The Revolutionaries, Rohit Saraf is Keeping the Ball Rolling this Year
कोरे कागज पर साइन नहीं की तो कर दी रिटाडर्य इंजीनियर की हत्या
पलासिया क्षेत्र में हुई हत्या का पर्दाफाश, आरोपियों ने संपत्ति के लालच में दिया था घटना को अंजाम
इंदौर. पलासिया थाना क्षेत्र के पॉश इलाके मनोरमागंज में 60 वर्षीय रिटायर्ड इंजीनियर की हत्या का पुलिस ने सोमवार को पर्दाफाश कर दिया. हत्या के पीछे मुख्य वजह उनकी प्रॉपर्टी रही. आरोपी की नजर उनकी करोड़ों की प्रॉपर्टी पर थी. आरोपी उनसे कोरे कागज पर साइन करवाना चाहता था, जब उन्होंने मना किया तो पहले सिर पर पाइप से वार किया, फिर साथी ने हथौड़ा दे मारा. इसके बाद डोरी और पर्दे की स्प्रिंग से गला घोंट दिया. हत्या के बाद एक आरोपी को इंदौर में छोड़कर बाकी दिल्ली भाग गए थे. यहां से मंदसौर पहुंचे जहां पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया.
डीआईजी हरिनारायणचारी मिश्र ने बताया कि फरार आरोपियों की तलाश हेतु टीमें विभिन्न शहरों व स्थानों पर भेजी गयी थी. सूचना पर आरोपी भय्यू उर्फ विवेक सोनकर, निलेश बौरासी मंदसौर से दबिश गिरफ्तार किया गया. आरोपियों से पूछताछ कर हत्या में शामिल आरोपी प्रफुल्ल शर्मा को भी पकड़ा गिरफ्तार किया गया. पलासिया पुलिस द्वारा की गई पुछताछ में आरोपी भय्यू उर्फ विवेक सोनकर ने बताया कि वह मृतक अजय शाह के घर पर पिछले 10 वर्षों से आता जाता रहता था. उसकी दादी भी पूर्व में मृतक के घर पर केयरटेकर का काम करती थी व आरोपी भय्यू उर्फ विवेक भी मृतक अजय व उसकी पत्नि का केयर टेकर के रुप में घरेलू काम भी करता था.
इसी वजह से मृतक व उसकी पत्नि को भय्यू पर विश्वास हो गया था. लेकिन आरोपी भय्यू की निगाह मृतक अजय शाह की कोई संतान नहीं होने से मृतक अजय शाह के घर व अन्य संपत्ति पर कब्जा करने की थी. घटना के एक वर्ष पूर्व आरोपी भय्यू ने अजय शाह का घर व अन्य संपति फर्जी तरीके से बेचने की योजना बनाई थी. तब उसने इसमें अपने साथियों को संलिप्त कर अजय शाह की हत्या कर उसके मकान व प्लाट पर कब्जा कर बेचने की योजना बनाई.
इस संबंध में उसने अपने दोस्त आशीष रामान से चर्चा की, आशीष ने बताया कि यदि अजय शाह की हत्या हो जाती है तो उनकी पत्नि को डरा धमकाकर मकान व प्लाट के कागज ले लेंगे व किसी वकील के माध्यम से संपत्ति को अपने नाम कराकर बेच देंगे लेकिन भय्यू ने इस काम में और लोगों भी शामिल करने का बताया है. इसी योजना के तहत भय्यू ने नीलेश को व मदसौर में रहने वाले उसके दोस्त हर्ष को तैयार किया व निलेश ने भी अपने एक दोस्त प्रफुल्ल शर्मा को भी तैयार किया.
जन्माष्टमी का दिन तय किया
योजना में यह तय हुआ कि पहले कोई तीन लोग मकान देखने जाएंगे और अजय शाह से किराये की बात करेंगे. इसके तहत घटना आशीष, भय्यू व हर्ष किराये का मकान देखने गये और लोहे के पाईप व हथोडे को ले जाकर मकान के प्रथम तल के आखिरी कमरे में छिपाकर रख आये. योजना को अंजाम देने के लिये किसी ऐसे दिन घटना को अंजाम देना तय किया जब लोगों का आना जाना कम हो. उन्हें यह पता था कि मृतक के घर काम वाली लड़की शाम 6 बजे के बाद आती है. इस बात को ध्यान में रखते हुए 12 अगस्त जन्माष्टमी की शाम 4 बजे का समय तय हुआ.
ऐसे दिया वारदात को अंजाम
योजना अनुसार भय्यू, निलेश व हर्ष घर के अंदर पहूँचे. आशीष घर के गेट पर निगाह रखने के लिये खडा रहा. हर्ष को आशीष बनाकर मृतक की पत्नि के समक्ष पेश किया गया. मृतक को विश्वास में लेकर निलेश भय्यू व हर्ष उपर कमरे में ले गये तथा उन्हे बंधक बनाकर कोरे दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने हेतु मजबूर करने लगे. मृतक द्वारा मना करने पर उनके साथ मारपीट चालू की. जब मृतक ने किसी भी कीमत पर कोरे कागज पर हस्ताक्षर नहीं किये तो निलेश व हर्ष ने उन्हें पीछे से पकड लिया. भय्यू ने पूर्व से छिपाकर रखे लोहे के पाईप से सिर पर वार करना चालू किये. निलेश ने लोहे के हथोडे से चोटें पहुँचाई. बिस्तर पर पटक दिया किंतु मृतक की सांस चलती रही तो उनको नीचे पटककर बाथरुम में लगे पर्दे की स्पींग से उनका गला घोट दिया. गला घोंटने में आरोपियों द्वारा कमरे में रखी डोरी का भी उपयोग किया गया किंतु वह डोरी टूट कर पलंग पर गिर गई.
पत्नी को बातों उलझाया
इसके बाद मृतक को कमरे में छोडकर तीनों आरोपी दरवाजा बंदकर नीचे मृतक की पत्नी के पास आये एवं उनसे मकान व प्लाट बेचने की बातें व किराये पर मकान देने की बात कर उनको बातों में उलझाने लगे । घटना में निलेश को हाथ में चौट आ गई थी एवं हर्ष वहाँ से चला गया था तब निलेश ने प्रफुल्ल शर्मा को फोन लगाकर बुलाया एवं मृतक की पत्नि को बताया कि यह भी किराये से रहेगा व यह किसी होटल में मेनेजर का काम करता है था उसका नाम भी आशीष शर्मा ही बताया.
लड़की के पहुंचने पर घबराए
इस दौरान घटना दिनांक को काम करने वाली शीतल करीब 5.30 बजे काम करने आ गई तो आरोपी घबरा गये. मृतक की पत्नि द्वारा बार-बार आरोपियों से मृतक के बारे में पूछने पर उन्होंने बताया कि अंकल जी पानी की टंकी में उपर काम कर रहें तो मृतक की पत्नी ने आरोपी भय्यू को फोन दिया कि यह फोन अंकल जी को देकर आये. उसके बाद भय्यू उपर गया व मृतक के पास कमरे में फोन रखकर वापस नीचे आ गया. अंजलि शाह द्वारा बार-बार फोन लगाने पर जब कोई उत्तर नहीं मिला तो उन्होंने शीतल को बोला कि तुम ऊपर देखकर आओ तो शीतल जब उपर देखने गई तो आरोपियों ने उसे अंतिम घटना वाला कमरा नहीं देखने दिया. बोला कि तीसरी मंजिल पर जाकर देख लो जब शीतल तीसरी मंजिल पर पहुंची तो आरोपी भय्यू व निलेश ने उसे कमरे में धक्का दे दिया व तकिये से उसका दम घोंटने लगे. आरोपियों को लगा कि वह मर गई है तो उसे बेहोशी हालत में उपर छोडकर घबराहट में नीचे सीढी पर लागाकर नीचे पास आ गये। आओरीपीगण द्वारा शीतल का फोन भी बंद करके स्वयं के पास रख लिया था ताकि मृतक की पत्नि अंजलि शीतल को फोन न लगा सके.
शीतल का बोले वो घर गई
मृतक की पत्नि का शीतल के बारे में पूछने पर उन्होने बताया कि शीतल अपने घर चली गई है, तब शीतल के घरवालों को मृतक की पत्नि द्वारा फोन किया गया तो उसके घरवाले शीतल के घर न पहुंचने के कारण मृतक के घर आ गये. आस पड़ोसियों द्वारा मृतक को लगाये गये. फोन की आवाज व शीतल के चिल्लाने की आवाज सुनकर नीचे आ गये तब आरोपियों ने देखा कि लोग इक_ा हो रहे हैं तो मृतक के घर पर जो भी दस्तावेज मिले उन्हें लेकर आरोपी वहाँ से भाग गये.
नजर रखने आशीष रूका इंदौर में
योजना के मुताबिक यह तय हुआ था कि घटना के बाद आशीष इंदौर में ही रहेगा ताकि होने वाली हर गतिविधि पर निगाह रखेगा व आरोपियों को सूचित करता रहेगा, शेष आरोपी निलेश की कार क्रं . एमपी-09- एचडी – 1947 से दिल्ली भय्यू के संबंधियों के यहाँ जायेंगे. इसी योजना के तहत यह लोग दिल्ली भागे जहाँ से पुलिस के पहुँचने की जानकारी मिलने पर मंदसौर आरोपी हर्ष के रिश्तेदार के यहाँ आ गये. बाद पुलिस ने लगातार इनका पीछा कर इनको पकड़ा गया. उक्त घटना में मुख्य भूमिका आरोपी भय्यू उर्फ विवेक सोनकर एवं आशीष रामा की थी. आशीष रामा द्वारा मृतक के मकान व प्लाट के कागज तैयार करने व उन्हें बैचने की जिम्मेदारी ली थी, घटना के दिन भी सबको इसी तरह समझाया था कि इस मकान व प्लाट को बेचने पर 8-8 लाख रुपये आरोपी हर्ष , प्रफुल्ल व निलेश को दिये जायेंगे तथा आरोपी आशीष व भय्यू उर्फ विवेक को शेष बचे हिस्से में से आधा आधा हिस्सा बांटा जायेगा।


